
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हिंदू उत्तराधिकार कानून पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि अमान्य विवाह (Void Marriage) से जन्मा पुत्र भी अपने मृतक पिता की संपत्ति का हकदार है। इतना ही नहीं, उसे दादी और सौतेली माँ से विरासत में मिली संपत्ति में भी हिस्सा मिलेगा।
मामला क्या था?
एक पुत्र ने दावा किया कि उसका जन्म अमान्य विवाह से हुआ है, लेकिन वह अपने पिता की संपत्ति का वारिस है।संपत्ति में पिता के साथ-साथ दादी और सौतेली माँ की ओर से मिली जमीन-जायदाद भी शामिल निचली अदालत ने हिस्सेदारी तय की थी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट का निर्णय
न्यायमूर्ति रवि नाथ तिलहरी और न्यायमूर्ति महेश्वर राव कुंचेम की खंडपीठ ने कहा कि:
- पुत्र को कुल संपत्ति में 5/6 हिस्सा मिलेगा।
- शेष 1/6 हिस्सा अन्य उत्तराधिकारियों को जाएगा।
- यदि नाबालिग अवस्था में कोई समझौता (compromise decree) अदालत की अनुमति के बिना हुआ है, तो वह बाद में चुनौती देकर रद्द कराया जा सकता है।
कानूनी आधार
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 16 – अमान्य विवाह से जन्मे बच्चों को वैध (legitimate) मानकर उत्तराधिकार का अधिकार देती है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 – यदि पिता, दादी या सौतेली माँ बिना वसीयत मृत्यु को प्राप्त हों, तो उनकी संपत्ति में यह पुत्र भी बराबरी से हिस्सा लेगा। सीपीसी, Order 32 Rule 7 – नाबालिग की ओर से अदालत की अनुमति बिना हुआ समझौता voidable होता है।
क्यों है यह फैसला खास?
इस फैसले ने यह स्पष्ट किया कि “जन्म की वैधता” (legitimacy) के आधार पर उत्तराधिकार का अधिकार छीना नहीं जा सकता। अब अमान्य विवाह से पैदा हुए बच्चों को भी संपत्ति में बराबरी का अधिकार मिलेगा, जिससे कई पारिवारिक विवादों का समाधान होगा। यह निर्णय पूरे देश के लिए persuasive precedent है, यानि अन्य अदालतें इसे संदर्भ के तौर पर देख सकती हैं।
✅ Legal Helpage की राय:
यह फैसला उन बच्चों के अधिकारों को मज़बूत करता है, जिनकी वैधता (legitimacy) पर सवाल उठाए जाते थे। कानून अब उनके साथ भेदभाव नहीं करेगा और उन्हें पिता तथा पैतृक संपत्ति में पूरा हिस्सा मिलेगा।
